वो बचपन मेरा
वो उज्जली सी सांझे,
वो रिमझिम सा सावन ,
वो मिट्टी की सौन्धियाहट ,
वो पुरानी सी छत
और इक भोले लड़के का भीगना
कुछ जब याद आता है....
मुझे वो अल्हड लड़का फिर बुलाता है |

वो रिमझिम सा सावन ,
वो मिट्टी की सौन्धियाहट ,
वो पुरानी सी छत
और इक भोले लड़के का भीगना
कुछ जब याद आता है....
मुझे वो अल्हड लड़का फिर बुलाता है |
वो कंधो के बस्ते ,
वो छुट्टी की सुबह ,
वो गाज़र का हलवा ,
वो गलियाँ भटकना ,
वो नानी की कहानी ,
वो भोली सी शकले ,
वो शामों की मस्ती
और मेरा साइकिल से यूँ गिर जाना
कुछ कुछ जब याद आता है....
मुझे वो अल्हड लड़का फिर बुलाता है |
उस मौसम की अब शाम हुई
ढलते सूरज को देखता
उस अल्हड लड़के को ढूँढता
मै यूँ कुछ खो जाता हूँ
कुछ कुछ जब याद आता है....
मुझे वो अल्हड लड़का फिर बुलाता है |
मिल जाए फिर तुम्हे कहीं वो अल्हड
पतंग उड़ाते ,
बारिश के पानी में छपाके लगाते ,
अठखेलिया करते ,
नंगे पाँव मिट्टी में घर बनाते ,
तो उससे ये कह देना
कोई तुम्हे कुछ कुछ याद करता है
की तुम्हें अल्हड़ लड़का कहकर बुलाता है
शाम को छतो पर
तुमको वो याद करके कहता है ,
कुछ कुछ जब याद करता हूँ
वो अल्हड लड़का मुझे फिर बुलाता है |
वो छुट्टी की सुबह ,
वो गाज़र का हलवा ,
वो गलियाँ भटकना ,
वो नानी की कहानी ,
वो भोली सी शकले ,
वो शामों की मस्ती
और मेरा साइकिल से यूँ गिर जाना
कुछ कुछ जब याद आता है....
मुझे वो अल्हड लड़का फिर बुलाता है |
उस मौसम की अब शाम हुई
ढलते सूरज को देखता
उस अल्हड लड़के को ढूँढता
मै यूँ कुछ खो जाता हूँ
कुछ कुछ जब याद आता है....
मुझे वो अल्हड लड़का फिर बुलाता है |
मिल जाए फिर तुम्हे कहीं वो अल्हड
पतंग उड़ाते ,
बारिश के पानी में छपाके लगाते ,

अठखेलिया करते ,
नंगे पाँव मिट्टी में घर बनाते ,
तो उससे ये कह देना
कोई तुम्हे कुछ कुछ याद करता है
की तुम्हें अल्हड़ लड़का कहकर बुलाता है
शाम को छतो पर
तुमको वो याद करके कहता है ,
कुछ कुछ जब याद करता हूँ
वो अल्हड लड़का मुझे फिर बुलाता है |
अजय सिंह राठोड
waah kya baat he..
ReplyDeletekya likha ha...........spiritual writting ...really heart touching
ReplyDeletebachpan yaad aa gaya
ReplyDeletei agree wid abov.. .sach mein bachpan yaad aa gya....so touching yar.. .keep on writing.. u rock!!
ReplyDeleteकोटि कोटि नमन..!
ReplyDeletehidden talent exposed
ReplyDeletepata nahi tha ki tu itna touching likhta hai...
ReplyDeletenice man...
This comment has been removed by the author.
ReplyDeletekya likhta hai..and kaise represent karna hai ye to koi inse seekhe..nhi seekhe seekhe.. aaj english literature ke beech bhi ager hamara hindi kavya agr asman ki unchaiyo ko chu aha hai to uska shreya sirf ajay jaise kaviyo ko jata hai..
ReplyDeleteye dava hai mera ki ajay jaisa kavi dunia me kahi bhi jayega vaha se hi apni kavitao se hindi sahitya me hamesha chamtkar lata rahega....
bachpane ki aad me darde-jawaani kah gaya,
ReplyDeletekah ke saari dil ki baatein ,
fir bhi tanha rah gaya,
sochta hai aaj me chup gaya hai tera kal kahin,
kah ke saari dil ki baatein,
fir bhi chup-chup rah gaya