Saturday, July 3, 2010

facebook पर मिलता नहीं



लैपटॉप के आगे बैठे जलती आँखों में,   
 किसी के आने के इंतज़ार  रहते है ,      
उसमे कुछ मेरे यार रहते है,
अब इन खटकते खट्को में
दिल कहीं धड़कते नहीं ,
अब इन smiley की smile में
हम क्यों उतना हस्ते नहीं ,
हजारों  है वेबसाइट    
पर अब दिल बहलते नहीं ,
 chatting में खूब बतियाते है
पर सामने कभी मिलते नहीं ,


म्यूजिक प्लयेर के गानों में 
ढोलक ताली वाली बात नहीं ,
facebook के कमेन्ट में
वो हॉस्टल की गाली वाली बात नहीं ,   
माँ के कहने पर भी
अब बाहर  टहलते क्यों नहीं ,
वो रंग ,वो शामे ,वो गलियाँ ,वो बातें
वो चौखट के टप्पे  ,  
वो नुक्कड़ की गप्पे
और उनका शाम को  छत  पर आना
facebook पर मिलता नहीं ............